जो देश अपने हथियार स्वयं बनाता है, वही अपना भाग्य स्वयं लिखता है : रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्री और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने शिरडी में एक निजी क्षेत्र के रक्षा विनिर्माण परिसर का उद्घाटन किया
भारत की पहली 300 किलोमीटर की यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चिंग प्रणाली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया
भारत को गोला-बारूद और स्वचालन के वैश्विक केंद्र में बदलने की आवश्यकता है, सरकार इसके लिए हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार है
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल युद्ध की आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह शांति, विकास और आर्थिक स्थिरता के लिए भी अनिवार्य है
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 23 मई, 2026 को शिरडी में निजी क्षेत्र की कंपनी एनआईबीई ग्रुप के रक्षा विनिर्माण परिसर का उद्घाटन करते हुए कहा, "जो राष्ट्र अपने हथियार स्वयं बनाता है, वह अपना भविष्य स्वयं लिखता है।" इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित थे। यह अत्याधुनिक परिसर उन्नत तोपखाने प्रणालियों, मिसाइल एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, रॉकेट प्रणालियों, ऊर्जावान सामग्री तथा स्वायत्त रक्षा प्लेटफार्मों के निर्माण के लिए विकसित किया गया है।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत भारत की पहली 300 किलोमीटर की सार्वभौमिक रॉकेट प्रक्षेपण प्रणाली 'सूर्यस्त्र' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस प्रणाली के लिए एक मिसाइल परिसर की आधारशिला भी रखी गई। इसके अलावा, समारोह के दौरान स्वदेशी टीएनटी संयंत्र प्रौद्योगिकी, आरडीएक्स संयंत्र प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय जैव-ऊर्जा संपीड़ित बायोगैस संयंत्र का अनावरण किया गया। उपग्रह संयोजन के क्षेत्र में एनआईबीई समूह और ब्लैक स्काई के बीच एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए।
रक्षा मंत्री ने गोला-बारूद उत्पादन में आत्मनिर्भरता के महत्व पर जोर दिया और विश्वास जताया कि यह परिसर रक्षा बलों की परिचालन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने तथा देश के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन, जो पहले मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और आयुध कारखानों तक सीमित था, वह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया गया है। उन्होंने कहा, "हमने निजी क्षेत्र की क्षमताओं को पहचाना है क्योंकि यह भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र में बदल सकता है।"
श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य के युद्धों का परिणाम देश की सैन्य शक्ति के आकार से नहीं, बल्कि गोला-बारूद और स्वचालन के क्षेत्र में उसकी प्रगति एवं क्षमताओं से निर्धारित होगा। उन्होंने कहा, “इस वास्तविकता की झलक रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति में देखी जा सकती है। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह क्षमता प्रदर्शित की थी।”
रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत के निजी उद्योगों को भविष्य के युद्ध की बारीकियों की गहरी समझ है और वे देश को अत्याधुनिक प्रणालियों से लैस करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने भारत को गोला-बारूद व स्वचालन के वैश्विक केंद्र में बदलने के लिए सभी हितधारकों के संयुक्त प्रयासों का आह्वान किया। श्री सिंह ने कहा कि सरकार महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और उन्नत प्रणालियों में 'मेक-इन-इंडिया' को लगातार बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा, "हम गोला-बारूद और स्वचालित प्रणालियों में भारत को अग्रणी बनाने के लिए हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार हैं।"
श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि प्रौद्योगिकी का मूल उद्देश्य सैनिकों की क्षमताओं को कम करना नहीं, बल्कि उन्हें और अधिक सशक्त बनाना है। रक्षा मंत्री ने कहा कि अंतिम निर्णय हमेशा मानव हाथों में ही रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक हथियार प्रणालियां और स्वचालित तकनीकें भविष्य के युद्धों में निर्णायक भूमिका निभाने जा रही हैं, इसलिए भारत के लिए इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ना अत्यंत आवश्यक है। श्री सिंह ने देशवासियों और रक्षा उद्योग से आह्वान करते हुए कहा, “आइए, हम सब मिलकर रक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत को पूर्णतः आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लें।” रक्षा मंत्री ने रक्षा कंपनियों से भविष्य की चुनौतियों व युद्ध आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भारत की सामरिक एवं तकनीकी क्षमताओं को और मजबूत बनाने का आग्रह भी किया।
रक्षा मंत्री ने पिछले एक दशक में रक्षा मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहसिक नीतिगत सुधार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के उदारीकरण, रणनीतिक साझेदारी मॉडल की शुरुआत, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों की अधिसूचना और इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडेक्स), एसिंग डेवलपमेंट ऑफ इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज विद आईडेक्स (एडीआईटीआई) तथा टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (टीडीएफ) जैसी योजनाओं के शुभारंभ से युवा नवप्रवर्तकों को प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया के दृष्टिकोण को साकार करने में निजी क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, क्योंकि वीर सैनिक घरेलू उद्योग द्वारा प्रदान की जा रही शक्ति के बल पर राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रहे हैं।
श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एक समय था जब रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र का योगदान नगण्य था और अब यह लगभग 25-30 प्रतिशत तक पहुंच गया है। हमारा लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस आंकड़े को 50 प्रतिशत तक ले जाना है। उन्होंने कहा कि यह नया भारत है, जहां निजी उद्योग केवल पुर्जों का आपूर्तिकर्ता नहीं है, बल्कि अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों का नवप्रवर्तक और निर्माता बनकर उभर रहा है। जब सरकार की दूरदृष्टि निजी क्षेत्र के नवाचार से मिलती है, तभी राष्ट्र नई ऊंचाइयों को छूता है।
रक्षा मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि आज की दुनिया में 'सुरक्षा' और 'अर्थव्यवस्था' को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता, क्योंकि एक मजबूत अर्थव्यवस्था एक सशक्त सेना तथा आधुनिक रक्षा क्षमताओं की नींव होती है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा निवेश, औद्योगिक विकास और समग्र विकास के लिए अनुकूल एक स्थिर वातावरण बनाती है। हालांकि, हम वर्तमान में व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं से लेकर दुर्लभ खनिजों तक, लगभग हर चीज के शस्त्रीकरण को देख रहे हैं। श्री सिंह ने कहा कि ऐसे समय में, हम अपनी रक्षा उत्पादन आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रह सकते। रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता केवल युद्ध की आवश्यकता नहीं है, बल्कि शांति, विकास और आर्थिक स्थिरता के लिए भी अनिवार्य है।”
श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज जिन संयंत्रों का उद्घाटन किया जा रहा है, वे अनुसंधान-उन्मुख केंद्र बनने के लिए तैयार हैं, जिससे भारत की रक्षा क्षमताओं को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चिंग सिस्टम के लिए बना मिसाइल कॉम्प्लेक्स भारत की भविष्य की युद्ध क्षमताओं को एक नई दिशा प्रदान करेगा। श्री सिंह ने कहा, "स्वदेशी तकनीक से संचालित यह रॉकेट प्रणाली हमारी मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी और रणनीतिक रूप से निर्णायक साबित होगी।"
रक्षा मंत्री ने इस बात की सराहना की कि यह परिसर न केवल उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों के लिए, बल्कि लघु एवं मध्यम उद्यमों, छोटे पैमाने के उद्योगों और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी एक विशाल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगा। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा, “गोला-बारूद, मिसाइलों, रॉकेट प्रणालियों और उपग्रह घटकों का उत्पादन सहायक इकाइयों, आपूर्तिकर्ताओं और विक्रेताओं को रोजगार प्रदान करेगा। इससे रोजगार सृजित होगा और इस क्षेत्र के युवाओं को अत्याधुनिक तकनीकी कौशल से सशक्त बनाया जाएगा, जिससे वे राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकेंगे।”
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया पहलों के माध्यम से देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सैनिकों की अद्वितीय वीरता और देश की बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों की सक्रिय व समान भागीदारी के कारण भारत के रक्षा तंत्र में परिवर्तन आया है और यह राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए रक्षा बलों को निरंतर मजबूती प्रदान करता रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत अपनी रणनीतिक शक्ति को बढ़ाते हुए वैश्विक शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने में रचनात्मक भूमिका निभा रहा है।
इस कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी प्रदर्शन, लघु एवं मध्यम उद्यमों की रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन और उद्योग जगत के नेताओं तथा रक्षा क्षेत्र के हितधारकों के साथ संवाद भी शामिल थे। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान; महाराष्ट्र सरकार के उद्योग मंत्री श्री उदय सामंत; जल संसाधन मंत्री श्री राधाकृष्ण ई. विखेपाटिल; रक्षा उत्पादन सचिव श्री संजीव कुमार; रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत; अन्य वरिष्ठ नागरिक एवं सैन्य अधिकारी, रणनीतिक साझेदार तथा उद्योग जगत के हितधारक इस अवसर पर उपस्थित थे।
