दवा कंपनियों की अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के उपाय
औषधि विभाग ने 12 मार्च 2024 को औषधि विपणन प्रथाओं के लिए एकसमान संहिता (यूनिफॉर्म कोड फॉर फार्मास्युटिकल्स मार्केटिंग प्रैक्टिसेज - यूसीपीएमपी) अधिसूचित की है। यूसीपीएमपी 2024 दवा कंपनियों द्वारा अनैतिक विपणन प्रथाओं को रोकने के लिए दिशानिर्देश हैं । इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि औषधि उत्पादों का प्रचार जिम्मेदारी से किया जाए। यह संहिता स्वास्थ्य पेशेवरों के समक्ष दवाओं के प्रचार के तरीके को निर्धारित करती है। यह संहिता दवा कंपनियों द्वारा स्वास्थ्य पेशेवरों या उनके परिवार के सदस्यों को उपहार, आर्थिक लाभ और आतिथ्य प्रदान करने पर रोक लगाती है। इसमें एक परिचालन ढांचा भी शामिल है, जिसमें शिकायतों को दर्ज करने, उनकी जांच करने और उनका निपटान करने की प्रक्रियाएं और उल्लंघन के मामलों में दंड के प्रावधान शामिल हैं।
इसके अलावा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, भारतीय चिकित्सा परिषद (पेशेवर आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता) विनियम, 2002 का खंड 6.8, दवा और संबद्ध स्वास्थ्य क्षेत्र उद्योग के साथ अपने संबंधों में डॉक्टरों के लिए आचार संहिता निर्धारित करता है।
इसके अतिरिक्त, भारतीय चिकित्सा परिषद (पेशेवर आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता) विनियम, 2002 के खंड 8.2 में कहा गया है कि पेशेवर कदाचार से संबंधित कोई भी शिकायत अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उपयुक्त चिकित्सा परिषद के समक्ष लाई जा सकती है। पेशेवर कदाचार की कोई भी शिकायत प्राप्त होने पर, उपयुक्त चिकित्सा परिषद जांच करेगी और पंजीकृत चिकित्सक को स्वयं या वकील के माध्यम से सुनवाई का अवसर प्रदान करेगी। यदि चिकित्सक पेशेवर कदाचार का दोषी पाया जाता है, तो उपयुक्त चिकित्सा परिषद आवश्यक दंड दे सकती है या दोषी पंजीकृत चिकित्सक का नाम रजिस्टर से पूर्णतः या एक निर्दिष्ट अवधि के लिए हटाने का निर्देश दे सकती है। रजिस्टर से नाम हटाने की सूचना स्थानीय प्रेस के साथ-साथ विभिन्न चिकित्सा संघों/सोसायटियों/निकायों के प्रकाशनों में व्यापक रूप से प्रकाशित की जाएगी।
यह जानकारी रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में लिखित जवाब के रूप में दी।
