केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री ने इंडसफूड 2026 के 9वें संस्करण का उद्घाटन किया
जीएसटी दरों में कमी से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बाजार विस्तार में मदद
निर्यात को मात्रा से मूल्य में परिवर्तित करने का आह्वान; वैश्विक ब्रांडों से भारत में अपने अनुसंधान एवं विकास केंद्र स्थापित करने की अपील
एपीईडीए की 'भारती पहल' कृषि-खाद्य स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने 8 जनवरी 2026 को ग्रेटर नोएडा स्थित एक्सपो मार्ट में इंडसफूड 2026 का उद्घाटन किया। इंडसफूड एशिया का प्रमुख खाद्य एवं पेय व्यापार मेला है। यह अब तक का सबसे बड़ा संस्करण है, जो 120,000 वर्ग मीटर के कुल क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इस अवसर पर एपीईडीए के अध्यक्ष श्री अभिषेक देव, भारतीय व्यापार संवर्धन परिषद के अध्यक्ष श्री मोहित सिंगला, अबू धाबी फूड हब (केईजेडएडी) के सीईओ श्री जेन्स वोल्फगैंग मिशेल, भीखाराम चंदमल के प्रबंध निदेशक श्री आशीष कुमार अग्रवाल के अलावा उद्योगपति, खरीदार, प्रदर्शक और वैश्विक खाद्य एवं पेय इकोसिस्टम के सदस्य उपस्थित थे।
अपने उद्घाटन भाषण में श्री पासवान ने कहा, “मैं आप सभी का समर्थन और प्रोत्साहन करने के लिए यहां हूं। केंद्र सरकार द्वारा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए एक अलग मंत्रालय होना ही इस क्षेत्र को दिए जाने वाले महत्व को दर्शाता है। हम सरकार और उद्योग के बीच सेतु बनने की कोशिश कर रहे हैं।” मंत्री महोदय ने इंडसफूड के 9वें सफल संस्करण के आयोजन और इस उद्योग को एक बड़ा मंच प्रदान करने के लिए के लिए टीपीसीआई को बधाई दी।
खाद्य प्रसंस्करण मंत्री ने आगे अपील की, “चूंकि अब हमारे पास खाद्य अधिशेष है, इसलिए हम सभी को इस मात्रा को मूल्य में परिवर्तित करने की आवश्यकता है। हम सभी इस क्षेत्र की ताकत और भारत की वैश्विक खाद्य टोकरी बनने की अपर्युक्त क्षमता को जानते हैं; अब संसाधनों को सही दिशा देने की जरूरत है।” उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय इस क्षेत्र में अधिक से अधिक उद्यमियों को सहायता कर रहा है।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारिकीकरण (पीएमएफएमई), प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई), राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान आदि जैसी योजनाएं किसानों और उद्योग दोनों को लाभ पहुंचा रही हैं। उन्होंने यह कहा कि राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान का दायरा अधिक राज्यों को कवर करने के लिए बढ़ाया जाएगा।
मंत्री महोदय ने कहा, “सरकार खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को अटूट समर्थन दे रही है और व्यापार करने में आसानी जैसे किसी भी सहायक नीतिगत मामले के लिए हर संभव प्रयास करेगी।” श्री पासवान ने बताया कि उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र पर उच्च जीएसटी दर का मुद्दा उठाया, जिसे जीएसटी सुधारों के माध्यम से संबोधित किया गया और जीएसटी को न्यूनतम स्तर यानी 5 प्रतिशत या 0 प्रतिशत तक घटा दिया गया, जिसने इस क्षेत्र के लिए अधिक बाजार पहुंच बनाने में मदद की।
अपने संबोधन में मंत्री महोदय ने सभी ब्रांडों से भारत में अपने अनुसंधान एवं विकास केंद्र खोलने की अपील की। भारत में भारी विविधता है और वैश्विक खाद्य प्लैटर पर नई किस्म पेश करने की अपार क्षमता है।
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) ने कृषि-खाद्य और एग्री-टेक स्टार्टअप्स को समर्थन देने के लिए एक पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य युवा उद्यमियों के लिए नवाचार को बढ़ावा देना और नए निर्यात अवसर पैदा करना है।
एपीईडीए के अध्यक्ष श्री अभिषेक देव ने कहा कि 'भारती' पहल, जिसका पूर्ण रूप 'भारत्स हब फॉर एग्रीटेक, रेजिलेंस, एडवांस्डमेंट एंड इंक्युवेशन फार एक्सपोर्ट एनेवलमेंट है, कृषि क्षेत्र के स्टार्टअप्स को सशक्त बनाने के उद्देश्य से डिज़ाइन की गई है।
उद्घाटन के अवसर पर ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ने इंडसफूड 2026 के विशाल स्वरूप को रेखांकित करते हुए बताया कि यह आयोजन 30 से अधिक देशों के 2,200 से अधिक प्रदर्शकों, 125,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में तथा 120 से अधिक देशों के 15,000 से अधिक खरीदार को एक साथ लाता है, जिससे संपूर्ण खाद्य एवं पेय मूल्य श्रृंखला को एक ही इकोसिस्टम में एकीकृत होती है। इस आयोजन में दो नए मंडप – पेट फूड एवं एनिमल न्यूट्रिशन तथा कुकवेअर एवं किचन वेअर- भी शामिल किए गए हैं, जो जीवनशैली में बदलाव, स्वास्थ्य जागरुकता, प्रीमियम उत्पादों की बढती मांग और स्थिरता जैसे वैश्विक रूझानों को दर्शाते हैं।
आईएफसीए के सहयोग से टीपीसीआई विश्व पाक कला विरासत सम्मेलन 2026 और 40 से अधिक ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है, जिनमें निवेश, निर्यात, नियमन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन और खाद्य इकोसिस्टम पर 150 से अधिक वक्ता शामिल होंगे। अबू धाबी फूड हब के सीईओ ने भारत-यूएई के बीच तालमेल, सतत व्यापार प्रथाओं पर जोर दिया और भारत-यूएई खाद्य गलियारे के लिए टीपीसीआई के साथ एक समझौता ज्ञापन की घोषणा की। भारत का खाद्य एवं पेय निर्यात 2024-25 में 47.3 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात 7.9 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें कोको और उससे संबंधित उत्पादों का प्रमुख योगदान रहा।
