क्या ग्राम पंचायतों में बढ़ सकती है वार्ड सदस्यों की भूमिका ?

क्या ग्राम पंचायतों में बढ़ सकती है वार्ड सदस्यों की भूमिका ?

क्या ग्राम पंचायतों में बढ़ सकती है बार्ड सदस्यों की भूमिका ? 

उत्तर प्रदेश में 7 लाख 31 हजार 813 की संख्या है वार्ड सदस्यों की।

अभी तक पूरी तरह से महत्वहीन समझे जाते थे पंचायतों के वार्ड मेम्बर 

रिपोर्ट :- संजीव सिपौल्या 

हाल ही में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव सम्पन्न हुआ है, सबसे ज्यादा उत्साह और गर्मा-गर्मी ग्राम प्रधान पद को लेकर रहती है । कोविड 19 के कारण अभी तक ग्राम प्रधानों का शपथ ग्रहण नही हो पाया है लेकिन जीते हुए प्रधानों और उनके समर्थकों के यहां उत्साह का दौर अभी भी जारी है , क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य भी अभी जीत की खुशी में हैं ,क्यों कि ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में उनकी भूमिका का अभी महत्व है । इस त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन में अगर कोई उत्साह में नही दिखाई दे रहा तो वह है ग्राम पंचायत का बार्ड सदस्य ।

पंचायती राज व्यवस्था में पंचायत सदस्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है । पंचायत की समितियां भी इनके बिना पूरी नही होती, और इन समितियों के माध्यम से ही ग्राम पंचायत के महत्वपूर्ण कार्य संपादित कराने की व्यवस्था है ,लेकिन बार्ड सदस्यों की भूमिका को पूरी तरह किनारे करके रख दिया गया है । स्थिति तो यहां तक आ गयी है कि लोग बार्ड सदस्यी का चुनाव लड़ने के लिए लाखों पदों पर पर्चा तक नही भरते और जो भरते भी है तो बहुत बड़ी संख्या में पंचायत सदस्य निर्विरोध चुन लिये जाते हैं ।वर्तमान में उत्तर प्रदेश में पंचायत सदस्यों की संख्या सात लाख इकतीस हजार आठ सौ तेरह है ,जिसमें से अभी बहुत सारे पद पर्चा दाखिल न किये जाने के कारण रिक्त पड़े है । कई जगह तो ग्राम पंचायतों में  बार्ड सदस्यों के पदों की रिक्त संख्या इतनी ज्यादा है कि कोरम ही पूर्ण नही हो पा रहा है ,और ऐसे में उन ग्राम प्रधानों की शपथ तक नही हो सकती ।इतनी भूमिका के बाद भी पंचायत सदस्यों को पूरी तरह ग्राम पंचायत के कार्यों से किनारे कर दिया जाता रहा है । वर्तमान चुनाव के बाद एक उम्मीद बढ़ी है कि क्या इस बार पंचायत सदस्यों की भूमिका में बदलाव होगा और उन्हें उनकी जिम्मेदारी का  निर्वहन करने दिया जाएगा तथा पंचायत समितियों के माध्यम से बार्ड सदस्य जनता के बीच कार्य करके लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई के जनप्रतिनिधि होने के रूप में अपनी सेवाएं दे पाएंगे । बार्ड सदस्यों की यह उम्मीद बढ़ने के दो कारण है । पहला यह कि भारत सरकार का पंचायती राज विभाग खुद इस विषय पर कार्य कर रहा है और पंचायत के सदस्यों को पंचायत के विषयों में क्षेत्र विशेषज्ञ के रूप में तैयार करने की योजना है । इस सम्बंध में बीते 28 फरवरी 2020 को विज्ञान भवन ,एनेक्सी,नई दिल्ली में देश भर से पंचायती राज विभाग के  अधिकारी और पंचायत क्षेत्र में कार्य करने वाले जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया गया था । पंचायतों पर काफी समय से कार्य कर रहे और छह बार राष्ट्रीय पुरुष्कार प्राप्त कर चुके अमित द्विवेदी इतिहास भी इस कार्यशाला में उत्तर प्रदेश की तरफ से शामिल थे और उन्होंने सचिव पंचायती राज भारत सरकार सुनील कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में चार राज्यों की तरफ से सुझाव भी रखे थे । अमित बताते है कि यह कार्यशाला अत्यन्त महत्वपूर्ण थी और इससे स्पष्ट हो गया था ऊपर स्तर पर भी लोगों को पता है कि पंचायतों में बार्ड सदस्यों की भूमिका की वर्तमान स्थिति क्या है ।कार्यशाला में पूरे देश से उपस्थित बिभिन्न लोगों से सुझाव लेने के बाद इस विषय पर गम्भीरता से कार्य करने के लिए सामग्री एकत्रित की गयी थी। बार्ड सदस्यों को क्षेत्र विशेषज्ञ बनाने की यह कार्यशाला महत्वपूर्ण और सार्थक रही । दूसरा कारण यह है कि अभी तक बार्ड सदस्यों की बात करने वाला और उनके लिए कार्य करके उनके मुद्दों को उचित मंच पर उठाने वाला न तो कोई संगठन अस्तित्व में था और न ही कोई नेतृत्व । अब पंचायत कार्यकर्ता अमित इतिहास के संयोजन में 'अखिल भारतीय ग्राम पंचायत सदस्य संगठन ' नाम से बार्ड सदस्यों का संगठन अस्तित्व में आया है, इससे बार्ड सदस्यों में एक आस जगी है । अमित बताते है कि ऐसे संगठन की बहुत आवश्यकता थी ,जब तक बार्ड सदस्य सक्रियता से ग्राम पंचायतों में अपनी भूमिका का निर्वहन नही करेंगे तब तक पंचायती राज व्यवस्था और ग्राम स्वराज की परिकल्पना जमीन पर साकार नही हो सकती । ग्रामों के सशक्तिकरण और पंचायतों को मजबूत करने के लिए बार्ड सदस्यों को अपनी भूमिका में आना ही होगा । आशा है कि नयी पंचायतों के बैधानिक गठन के बाद बार्ड सदस्यों की भूमिका सक्रिय होगी और वह ग्राम पंचायतों में अपनी उपयोगिता साबित कर पाएंगे ।

3 टिप्पणियाँ

  1. वार्ड सदस्यों को गांव के विकास के लिए जागरूक और वे अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभा पाएं इसके लिए उनकी क्षमता वृद्धि कार्यशाला एवं प्रशिक्षण आयोजित कराने की आवश्यकता होगी।

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Journalist Anil Prabhakar

Editor UPVIRAL24 NEWS