नशे की लत से छुटकारा पाने तक
आशा राम की नई आशा और समाज में फिर से शामिल होने की कहानी
श्री रमेश कुमार (बदला हुआ नाम) का अनुभव दिखाता है कि कैसे समय रहते मदद मिलने और सहानुभूतिपूर्ण पुनर्वास के माध्यम से कोई व्यक्ति नशे की लत से बाहर निकलकर एक स्वस्थ और सम्मानजनक भविष्य अपना सकता है।
मध्य प्रदेश के मंडला स्थित 'सैद्धांतिक नशा मुक्ति केंद्र' में एनएपीडीडीआर (नशीली दवाओं की मांग कम करने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना) के तहत मिली सहायता से, उन्होंने नई आशा जगाने, अपनी सेहत सुधारने और समाज में फिर से शामिल होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उनकी कहानी सुधार में सहायक समावेशी सेवाओं के महत्व को दर्शाती है और लोगों को उनके परिवारों और समुदायों से फिर से जुड़ने में सहायता प्रदान करती हैं।
मध्य प्रदेश के मंडला जिले के रहने वाले 55 वर्षीय श्री रमेश कुमार को लंबे समय तक नशीले पदार्थों के सेवन के कारण कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले और मिडिल स्कूल तक पढ़े-लिखे श्री रमेश बेरोजगार थे। नशे की वजह से उनकी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य खराब हो गया था। आर्थिक स्थिति बिगड़ने के साथ ही पारिवारिक रिश्तों में भी दरार आ गई थी। उन्हें डिप्रेशन (अवसाद) का सामना करना पड़ा, वे समाज से कट गए थे और अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में भी उन्हें काफी कठिनाई हो रही थी।
नशे की लत ने उनके ध्यान लगाने की क्षमता और याददाश्त पर बुरा असर डाला। इस कारण उनके लिए अपने दैनिक जीवन पर फिर से नियंत्रण पाना मुश्किल हो गया। उनके पास जो भी आर्थिक संसाधन थे, वे अक्सर नशे पर खर्च हो जाते थे। इससे उनकी आर्थिक तंगी और बढ़ गई। नशे की लत से जुड़े सामाजिक कलंक और भेदभाव ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं। वे समय रहते मदद लेने से भी हिचकिचाते रहे। खराब पारिवारिक रिश्ते और समाज से बहिष्कृत होने के कारण ये चुनौतियां और भी गंभीर हो गईं।
उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव तब आया, जब उन्हें मध्य प्रदेश के मंडला में 'सैद्धांतिक शिक्षा समिति' द्वारा संचालित 'सैद्धांतिक नशा मुक्ति केंद्र' में मदद मिली। यह केंद्र 'नशीली दवाओं की मांग कम करने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना' (एनएपीडीडीआर) के अंतर्गत काम करता है। 7 मई 2026 से उन्हें नशे की लत से जुड़े चिकित्सीय, मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक और सामाजिक पहलुओं को सुलझाने के लिए व्यापक सहायता मिलनी शुरू हुई।
इस केंद्र ने उन्हें मुफ्त और व्यवस्थित सहायता प्रदान की, जिसमें मेडिकल डिटॉक्सिफिकेशन (शरीर से नशा के लत को समाप्त करना), व्यक्तिगत काउंसलिंग, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी), पारिवारिक थेरेपी, पुनर्वास गतिविधियां और रिकवरी के दौरान रहने के लिए सुरक्षित जगह शामिल थी। काउंसलिंग और विभिन्न थेरेपी के माध्यम से उन्हें यह समझने में मदद मिली कि नशे की लत का क्या असर होता है। साथ ही, उन्हें भावनात्मक परेशानी को संभालने और मुश्किल परिस्थितियों से निपटने के लिए स्वस्थ तरीके विकसित करने का मार्गदर्शन भी मिला।
पारिवारिक परामर्श और शिक्षा ने आपसी समझ को मजबूत करने में सहायता की और उनके ठीक होने के लिए एक सहयोगी माहौल को बढ़ावा दिया। ग्रुप थेरेपी और रिलैप्स-प्रिवेंशन (दोबारा बीमारी न होने देने) की ट्रेनिंग ने उन्हें अपना आत्मविश्वास फिर से हासिल करने, जीवन के लिए जरूरी कौशल विकसित करने और ऐसी स्थितियों का सामना करने के लिए तैयार होने में मदद की, जो उनकी प्रगति के लिए खतरा बन सकती थीं। इस एकीकृत दृष्टिकोण ने न केवल उनके इलाज में, बल्कि उनकी भावनात्मक भलाई, पारिवारिक रिश्तों और समाज में फिर से घुलने-मिलने में भी मदद की।
सेंटर से मिले सहयोग से मिस्टर रमेश कुमार ने अपने स्वास्थ्य में तेजी से सुधार किया। उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति बेहतर हुई है और उन्हें पहले से ज़्यादा भावनात्मक स्थायित्व और आत्मविश्वास मिला है। उनके परिवार के साथ संबंध भी बेहतर हुए हैं। इससे उन्हें अधिक स्थायी और सामाजिक जीवन जीने में मदद मिली है।
हालांकि वह अभी भी बेरोज़गार हैं, लेकिन सुधार प्रक्रिया ने उन्हें आत्मविश्वास वापस पाने और भविष्य में रोजी-रोटी के मौकों के लिए तैयार होने में सहायता की है। उनकी कहानी लोगों को नशे की लत से उबरने और अपनी ज़िंदगी फिर से बनाने में सहायता करने के लिए आसानी से मिलने वाली नशा मुक्ति सेवायें, प्रोफेशनल काउंसलिंग, परिवार की भूमिका और लगातार पुनर्वास के महत्व को दिखाता है।
