डिजिटल ग्राम परियोजना
दूरसंचार विभाग (डॉट), संचार मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, देश के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों एवं द्वीपों में, जहां वर्तमान में इंटरनेट/ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और मोबाइल सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां उच्च बैंडविड्थ क्षमता वाली इंटरनेट/ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी एवं मोबाइल सेवाएं प्रदान करने के लिए, दूरसंचार विभाग (डॉट) के डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) [पूर्ववर्ती सार्वभौमिक सेवा दायित्व कोष (यूएसओएफ)] से प्राप्त निधि से कई कदम और परियोजनाएं शुरू की गई हैं। भारतनेट परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है ताकि देश की सभी ग्राम पंचायतों (जीपी) को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान की जा सके। फरवरी 2026 तक, भारतनेट परियोजना के तहत देश में लगभग 2,17,805 ग्राम पंचायतों को सेवा के लिए तैयार किया जा चुका है, जिनमें तमिलनाडु की 10,886 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इसके अलावा, भारत सरकार द्वारा 04.08.2023 को अनुमोदित संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (एबीपी) को भारतनेट के प्रथम और द्वितीय चरण के मौजूदा नेटवर्क के उन्नयन के लिए कार्यान्वित किया जा रहा है, जिससे शेष ग्राम पंचायतों में नेटवर्क का निर्माण सुनिश्चित हो सके और आवश्यकता के आधार पर शेष गैर-ग्राम पंचायत गांवों को भी कनेक्टिविटी प्रदान की जा सके।
4जी सैचुरेशन परियोजना और अन्य मोबाइल परियोजनाओं के तहत, फरवरी 2026 तक देश के उन दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में 24,263 मोबाइल टावर चालू किए जा चुके हैं जहां अब तक नेटवर्क नहीं पहुंचा है। चेन्नई और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (2312 किलोमीटर) के बीच और मुख्य भूमि (कोच्चि) और लक्षद्वीप द्वीप समूह (1869 किलोमीटर) के बीच पनडुब्बी ऑप्टिकल फाइबर केबल के चालू होने तथा लक्षद्वीप द्वीप समूह में एफटीटीएच और अन्य सेवाओं के प्रावधान के लिए 225 किलोमीटर ओएफसी नेटवर्क के निर्माण ने द्वीपों में फिक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड/इंटरनेट सेवाओं, मोबाइल सेवाओं (4जी/5जी) और अन्य हाई-स्पीड डेटा सेवाओं के तेजी से विस्तार को सुविधाजनक बनाया है।
ग्रामीण विकास विभाग ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), उन्नत कंप्यूटिंग विकास केंद्र (सीडीएसी) और डिजिटल इंडिया निगम (डीआईसी) के सहयोग से अपनी प्रमुख योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए विभिन्न आईटी-आधारित समाधानों को डिजाइन, विकसित और कार्यान्वित किया है। डिजिटल विभाजन को कम करने और अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए, ग्राम पंचायत स्तर पर सेवाएं प्रदान करने वाले डिजिटल शासन समाधानों को ऑफलाइन क्षमताओं, दिव्यांग-अनुकूल मंचों एवं बहुभाषी सुविधाओं के साथ सरल यूजर इंटरफेस के साथ विकसित किया गया है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि इन समाधानों की पहुंच केवल इंटरनेट से जुड़े क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इनकी पहुंच दूरस्थ या इंटरनेट से नहीं जुड़े क्षेत्रों तक भी है।
यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।
