तथ्य पत्रक
भारत और यूरोपीय संघ व्यापार समझौता
अवसरों का जनक “सभी सौदों का मूल” यह समझौता भारत को 2047 तक सशक्त बनाएगा
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए वार्ता संपन्न होने की घोषणा की है। यह भारत की सबसे रणनीतिक आर्थिक साझेदारियों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आधुनिक, नियम-आधारित व्यापार साझेदारी के रूप में यह मुक्त व्यापार समझौता समकालीन वैश्विक चुनौतियों का समाधान करते हुए दुनिया की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बाजार एकीकरण को और अधिक सक्षम बनाता है।
भारत और यूरोपीय संघ के संयुक्त बाजार का अनुमानित मूल्य 2091.6 लाख करोड़ रुपये (24 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर) से अधिक है। इससे भारत और यूरोपीय संघ की दो अरब आबादी को अभूतपूर्व अवसर प्राप्त होते हैं। यह मुक्त व्यापार समझौता व्यापार और नवाचार की अपार संभावनाओं को हमारे सामने रखता है। व्यापार मूल्य के हिसाब से भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात के लिए यह मुक्त व्यापार समझौता पहले से बेहतर बाजार पहुंच प्रदान करता है। इसके साथ ही यह संवेदनशील क्षेत्रों के लिए नीतिगत गुंजाइश बनाए रखता है और भारत की विकासात्मक प्राथमिकताओं को सुदृढ़ करता है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार में 2024-25 में लगभग 11.5 लाख करोड़ रुपये यानि (136.54 अरब अमेरिकी डॉलर) की निरंतर वृद्धि देखी गई है। भारत ने यूरोपीय संघ को लगभग 6.4 लाख करोड़ रुपये (75.85 अरब अमेरिकी डॉलर) का निर्यात किया। सेवा क्षेत्र में भारत-यूरोपीय संघ का व्यापार 2024 में 7.2 लाख करोड़ रुपये (83.10 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया।
स्वस्थ और बढ़ते व्यापार के बावजूद, दोनों देशों के बाज़ार और व्यापार में वृद्धि को देखते हुए अपार संभावनाएं मौजूद हैं। मुक्त व्यापार समझौता भारत और यूरोपीय संघ दोनों के लिए एक अनूठा मार्ग प्रदान करता है और एक-दूसरे के प्रमुख आर्थिक साझेदार के रूप में उभरने की अपार संभावनाएं लेकर आता है।
रणनीतिक महत्व का यह मुक्त व्यापार समझौता भारत-यूरोपीय संघ सम्बंधों को पारंपरिक से आधुनिक, बहुआयामी साझेदारी में बदलने के साथ ही निर्यातकों के लिए एक स्थिर और पूर्वानुमानित वातावरण प्रदान करता है। इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम – (एमएसएमई) सहित भारतीय व्यवसायों को दीर्घकालिक निवेश की योजना बनाने, यूरोपीय मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत होने और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच लगातार अनुकूल बाजार पहुंच सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
निर्बाध बाजार पहुंच के माध्यम से व्यवसायों को सशक्त बनाना और भविष्य को सुरक्षित करना
भारत ने यूरोपीय बाजारों तक रणनीतिक पहुंच बनाई है।
भारत ने विशेष रूप से 99.5 प्रतिशत व्यापार मूल्य को कवर करते हुए, 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर यूरोपीय बाजारों में प्राथमिकता वाली पहुंच बनाई है:
भारत के 90.7 प्रतिशत निर्यात के अंतर्गत आने वाली 70.4 प्रतिशत टैरिफ लाइनों से कपड़ा, चमड़ा और जूते, चाय, कॉफी, मसाले, खेल के सामान, खिलौने, रत्न और आभूषण और कुछ समुद्री उत्पाद जैसे महत्वपूर्ण श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए तत्काल शुल्क हटा दिया जाएगा।
भारत के निर्यात के 2.9 प्रतिशत हिस्से के अंतर्गत आने वाली 20.3 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर कुछ समुद्री उत्पादों, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, हथियारों और गोला-बारूद आदि के लिए 3 और 5 वर्षों में शून्य शुल्क की सुविधा होगी ;
भारत के निर्यात के 6 प्रतिशत हिस्से के अंतर्गत आने वाली 6.1 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को कुछ पोल्ट्री उत्पादों, संरक्षित सब्जियों, बेकरी उत्पादों आदि के लिए टैरिफ में कमी के माध्यम से या कारों, स्टील, कुछ झींगा/प्रॉन उत्पादों आदि के लिए टीआरक्यू के माध्यम से प्राथमिक रूप से पहुंच प्राप्त होगी।
प्रमुख श्रम-प्रधान क्षेत्र (जैसे वस्त्र, परिधान, समुद्री उद्योग, चमड़ा, जूते, रसायन, प्लास्टिक/रबर, खेल सामग्री, खिलौने, रत्न और आभूषण), इनका कुल मूल्य 2.87 लाख रुपये से अधिक है।
यूरोपीय संघ में रोजगार सृजन के लिए वर्तमान में 4 प्रतिशत से 26 प्रतिशत तक आयात शुल्क के अधीन रहने वाले 33 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात उत्पाद महत्वपूर्ण हैं। निर्यात किए जाने वाले उत्पाद मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लागू होते ही शून्य शुल्क के दायरे में आ जाएंगे और इस प्रकार यूरोपीय संघ के बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी। ये क्षेत्र शुल्क उदारीकरण और बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धात्मकता का लाभ लेने के लिए तैयार हैं। इससे वैश्विक और यूरोपीय मूल्य श्रृंखलाओं में उनका गहरा एकीकरण संभव होगा और साथ ही रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
भारत द्वारा यूरोपीय संघ को दिया गया प्रस्ताव
कुल मिलाकर, भारत अपनी 92.1 प्रतिशत टैरिफ लाइनों की पेशकश कर रहा है जो यूरोपीय संघ के 97.5 प्रतिशत निर्यात को कवर करती हैं, विशेष रूप से:
49.6 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तत्काल शुल्क समाप्त कर दिया जाएगा;
टैरिफ लाइनों में से 39.5 प्रतिशत को पांच, सात और 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाना है।
तीन प्रतिशत उत्पाद चरणबद्ध शुल्क कटौती के दायरे में हैं और सेब, नाशपाती, आड़ू, कीवी जैसे कुछ उत्पाद टीआरक्यू की श्रेणी में आते हैं।
यूरोपीय संघ से उच्च प्रौद्योगिकी वस्तुओं के आयात से भारत के आयात स्रोतों में विविधता आने की आशा है। इससे व्यवसायों के लिए इनपुट लागत कम होगी, उपभोक्ताओं को लाभ होगा और भारतीय व्यवसायों के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत होने के अवसर पैदा होंगे।
पर्याप्त सुरक्षा उपायों के साथ कृषि विकास और किसानों की आजीविका को बढ़ावा देना
इस मुक्त व्यापार समझौते से भारतीय कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र पर महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशा है। चाय, कॉफी, मसाले, अंगूर, अचार और खीरे, सूखे प्याज, ताजी सब्जियां और फल, साथ ही प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों जैसे कृषि उत्पादों के लिए तरजीही बाजार पहुंच से यूरोपीय संघ में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
इस बाजार तक पहुंच से किसानों की वास्तविक आय में वृद्धि होगी, ग्रामीण आजीविका मजबूत होगी और भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
भारत ने घरेलू प्राथमिकताओं के साथ निर्यात वृद्धि को संतुलित करते हुए, डेयरी, अनाज, मुर्गी पालन, सोयामील, कुछ फलों और सब्जियों आदि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की विवेकपूर्ण सुरक्षा की है। यह मुक्त व्यापार समझौता भारतीय कृषि उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में उच्च मूल्य दिलाने का काम करने, क्षेत्रीय समृद्धि को बढ़ावा देने और स्थायी आजीविका एवं विश्वसनीय आय के अवसरों के माध्यम से दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करने में सहायक है।
मौजूदा आपूर्ति श्रृंखलाओं के अनुरूप उत्पाद विशिष्ट नियम
मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) यह सुनिश्चित करता है कि इसके अंतर्गत निर्यात की जाने वाली वस्तुओं का पर्याप्त प्रसंस्करण या विनिर्माण किया जाए ताकि उन्हें मूल वस्तु का दर्जा और प्राथमिकता वाली पहुंच प्राप्त हो सके। उत्पाद विशिष्ट नियम (पीएसआर) संतुलित हैं और मौजूदा आपूर्ति श्रृंखलाओं के अनुरूप हैं। ये उत्पाद विशिष्ट नियम यह सुनिश्चित करते हैं कि पक्षकारों में पर्याप्त प्रसंस्करण किया जाए, साथ ही वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से इनपुट प्राप्त करने के लिए पर्याप्त लचीलापन भी प्रदान किया जाए।
इसके अलावा, मुक्त व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को कम करके व्यापार करने में आसानी प्रदान करेगा, क्योंकि इससे मूल प्रमाण पत्र के माध्यम से स्व-प्रमाणन की सुविधा मिलेगी। पीएसआर (सार्वजनिक सेवा नियामक) लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए झींगा और एल्युमीनियम उत्पादों के लिए कोटा निर्धारित करके अभिनव मार्ग प्रशस्त करते हैं। इससे एमएसएमई गैर-मूल इनपुट प्राप्त हो सकेंगे। ये मशीनरी और एयरोस्पेस क्षेत्र में कुछ उत्पाद विशिष्ट नियम के लिए संक्रमणकालीन अवधि निर्धारित करके 'मेक इन इंडिया' को भी प्रोत्साहन देते हैं।
सेवाएं - भविष्य में व्यापार के विकास की प्रमुख चालक
दोनों अर्थव्यवस्थाओं में सेवाओं का प्रभुत्व और तेजी से विकास होने के कारण भविष्य में व्यापार में इनकी भागीदारी अधिक होगी। बाजार तक निश्चित पहुंच, गैर-भेदभावपूर्ण व्यवहार, डिजिटल माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाना और आवागमन में सुगमता जैसी कारक सेवा निर्यात को बढ़ावा देने की उम्मीद है।
मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत, आईटी/आईटीईएस, पेशेवर सेवाएं, शिक्षा और अन्य व्यावसायिक सेवाओं सहित 144 सेवा उपक्षेत्रों में यूरोपीय संघ से व्यापक और गहन प्रतिबद्धताएं प्राप्त की गई हैं। यह सेवा क्षेत्रों की बड़ी श्रृंखला तैयार करता है। इसमें भारतीय सेवा प्रदाताओं को यूरोपीय संघ के बाजार में अपनी सेवाएं प्रदान करने के लिए एक स्थिर और अनुकूल व्यवस्था मिलेगी। भारत की प्रतिस्पर्धी, उच्च-तकनीकी सेवाओं से भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ यूरोपीय संघ के व्यवसायों और उपभोक्ताओं को भी लाभ होने की उम्मीद है।
भारत का 102 उपक्षेत्रों पर प्रस्ताव पेशेवर, व्यावसायिक, दूरसंचार, समुद्री, वित्तीय और पर्यावरण सेवाओं जैसे यूरोपीय संघ की प्राथमिकताएं शामिल करता है। इससे यूरोपीय संघ के व्यवसायों को भारत में निवेश और नवोन्मेषी सेवाएं लाने के लिए एक सुनियोजित व्यवस्था मिलेगी। इससे उनके निर्यात में वृद्धि होगी और भारतीय व्यवसायों को सर्वोत्तम सेवाएं प्रदान की जा सकेंगी। यह पारस्परिक रूप से लाभकारी ढांचा सेवाओं में व्यापार को गति देगा, भारतीय पेशेवरों और व्यवसायों के लिए नए अवसर खोलेगा और उच्च मूल्य वाले वैश्विक बाजारों में भारत की उपस्थिति को मजबूत करेगा। इससे नवाचार, कौशल गतिशीलता और ज्ञान आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
यूरोप भर में भारत की प्रतिभा को सशक्त बनाना
मुक्त व्यापार समझौता व्यावसायिक आगंतुकों, अंतर-कॉर्पोरेट स्थानांतरणकर्ताओं, संविदात्मक सेवा आपूर्तिकर्ताओं और स्वतंत्र पेशेवरों सहित पेशेवरों के लिए अस्थायी प्रवेश और रहने के लिए एक सुनिश्चित व्यवस्था स्थापित करता है।
भारत एक व्यापक गतिशीलता ढांचे के माध्यम से प्रतिभा के वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है। यह ढांचा यूरोपीय संघ में स्थापित भारतीय कंपनियों के कर्मचारियों (और उनके जीवनसाथी और आश्रितों) के लिए सभी सेवा क्षेत्रों में आवागमन को सुगम बनाता है। यूरोपीय संघ के ग्राहकों को अनुबंध के तहत सेवाएं प्रदान करने वाली व्यावसायिक संस्थाओं के लिए, भारत आईटी, व्यवसाय और पेशेवर सेवाओं सहित 37 उप-क्षेत्रों तक पहुंच प्रदान कर सकता है।
यूरोपीय संघ के ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करने के इच्छुक स्वतंत्र पेशेवरों को आईटी, अनुसंधान एवं विकास तथा उच्च शिक्षा सहित 17 उप-क्षेत्रों में निश्चितता प्राप्त होती है। इससे भारतीय पेशेवरों और ज्ञान-आधारित व्यापार के लिए विस्तारित अवसर सृजित होते हैं। भारत और यूरोपीय संघ ने सभी यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के साथ 5 वर्षों में सामाजिक सुरक्षा समझौतों को सक्षम बनाने और भारतीय छात्रों के अध्ययन और अध्ययन के बाद कार्य वीजा प्राप्त करने और प्रवेश के लिए निरंतर अनुकूल ढांचा तैयार करने के लिए एक रचनात्मक ढांचे पर सहमति व्यक्त की है।
भारतीय पारंपरिक चिकित्सा के क्षितिज का विस्तार
इस मुक्त व्यापार समझौते से भारतीय पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं और चिकित्सकों को बढ़ावा मिलने की आशा है। यूरोपीय संघ के उन सदस्य देशों में जहां नियम मौजूद नहीं हैं, आयुष चिकित्सक भारत में प्राप्त पेशेवर योग्यताओं का उपयोग करके अपनी सेवाएं प्रदान कर सकेंगे।
यह मुक्त समझौता यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में आयुष स्वास्थ्य केंद्रों और क्लीनिकों की स्थापना के लिए भविष्य की निश्चितता और यूरोपीय संघ की खुली नीति को सुनिश्चित करता है। यह समझौता भारतीय पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के व्यापार को सुगम बनाने के लिए यूरोपीय संघ के साथ अधिक आदान-प्रदान की परिकल्पना भी करता है।
नवाचार करें, सुरक्षा करें, समृद्धि प्राप्त करें: बौद्धिक संपदा को बढ़ावा देना
यह मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, डिजाइन, व्यापार रहस्य, पौधों की किस्मों और बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रवर्तन से सम्बंधित टीआरआईपीएस के तहत प्रदान की गई बौद्धिक संपदा सुरक्षा को सुदृढ़ करता है। इससे दोहा घोषणा की पुष्टि होती है और डिजिटल पुस्तकालयों, विशेष रूप से भारत द्वारा शुरू की गई पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय (टीकेडीएल) परियोजना के महत्व को मान्यता मिलती है। इसके साथ ही यह आईपीआर अध्याय प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से सम्बंधित अपने-अपने कानूनों और प्रथाओं पर विचारों और सूचनाओं के आदान-प्रदान का प्रावधान करता है। इसमें सूचना प्रवाह, व्यावसायिक साझेदारी आदि को सुगम बनाने के उपाय शामिल हैं।
सुरक्षित, मानकीकृत और निर्बाध व्यापार के लिए एसपीएस और टीबीटी सम्बंधों को मजबूत करना
यह मुक्त व्यापार समझौता एसपीएस और टीबीटी मामलों पर बेहतर सहयोग को बढ़ावा देता है। इससे अनुरूपता मूल्यांकन परिणामों की मान्यता आसान होगी और तकनीकी औचित्य और कीट/रोग प्रकोपों के स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रियाओं के आधार पर एसपीएस उपायों में समानता सुनिश्चित होगी। डिजिटलीकरण, सूचना साझाकरण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के पालन के माध्यम से, यह मुक्त व्यापार समझौता व्यापार बाधाओं को कम करता है, बाजार तक सुगम पहुंच को बढ़ावा देता है और निर्यातकों के लिए नियामक पूर्वानुमान को मजबूत करता है।
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के तहत क्षेत्रीय लाभ
कृषि से परे विकास का लाभ उठाना: तरजीही पहुंच कृषि विकास को बढ़ावा देती है
भारत को अपने कृषि निर्यात के लिए प्राथमिकता वाले बाजार पहुंच प्राप्त होती है। इससे प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, चाय, कॉफी, मसालों, अंगूर, देसी खीरा और अचार वाला खीरा, भेड़ और मेमने का मांस, मीठा मक्का, सूखा प्याज और कुछ अन्य फल और सब्जी उत्पादों के लिए प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिलता है।
इससे ग्रामीण आय, महिलाओं की भागीदारी और यूरोप में एक प्रीमियम, भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
डेयरी, अनाज, मुर्गी पालन, सोयामील, कुछ फल और सब्जियां आदि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए रणनीतिक सुरक्षा उपाय घरेलू प्राथमिकताओं की रक्षा करते हुए निर्यात वृद्धि सुनिश्चित करते हैं।
इंजीनियरिंग उत्कृष्टता के माध्यम से निर्यात को गति देना
वर्तमान में इंजीनियरिंग वस्तुओं पर प्राथमिकता वाली बाजार पहुंच के लिए 22 प्रतिशत तक का शुल्क लगता है। ऐसे में, इस मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से यूरोपीय संघ को भारत के निर्यात में वृद्धि होने की आशा है, जो लगभग 1.44 लाख करोड़ रुपये (16.6 अरब अमेरिकी डॉलर) है, और यूरोपीय संघ के लगभग 174.3 लाख करोड़ रुपये (2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर) के इंजीनियरिंग वस्तुओं के आयात में भारत की हिस्सेदारी में भी सुधार होगा। यह मुक्त व्यापार समझौता सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के नेतृत्व वाले औद्योगिक केंद्रों को सशक्त बनाने, औद्योगिक आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए तैयार है।
रोजगार और विकास: श्रम प्रधान उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मकता में लाभ प्राप्त हुआ।
वस्त्र, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, खेल के सामान, खिलौने और रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्रों को शुल्क उन्मूलन के माध्यम से बेहतर प्रतिस्पर्धात्मकता प्राप्त होती है। इससे रोजगार सृजन और यूरोपीय संघ के बाजार एकीकरण को समर्थन मिलता है।
यूरोप में भारत के चमड़े और जूते के निर्यात को बढ़ावा देना
भारत की विश्व स्तर पर प्रशंसित शिल्प कौशल और चमड़ा एवं जूता क्षेत्र में लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमई) नवाचार, जो महत्वपूर्ण रोजगार का समर्थन करता है, यूरोप के मंच पर अभूतपूर्व छलांग लगाने के लिए तैयार है।
मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लागू होने पर सभी शुल्क मदों पर शुल्क को 17 प्रतिशत से घटाकर शून्य करने से यूरोपीय संघ को भारत के निर्यात के लिए समान अवसर मिलेंगे। भारत के निर्यात का मूल्य लगभग 20.9 हजार करोड़ रुपये (2.4 अरब अमेरिकी डॉलर) है और यूरोपीय संघ के लगभग 8.71 लाख करोड़ रुपये (100 अरब अमेरिकी डॉलर) के चमड़े और जूते के आयात में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी। नियामकीय सामंजस्य, सरलीकृत अनुपालन और डिजाइन-आधारित, टिकाऊ उत्पादों के लिए समर्थन से कम लाभ वाले उत्पादन से मूल्यवर्धित वैश्विक नेतृत्व की ओर बदलाव संभव होगा।
समुद्री निर्यात को मिलने वाला बड़ा प्रोत्साहन
व्यापार मूल्य के 100 प्रतिशत हिस्से को कवर करने वाली प्राथमिकता वाली पहुंच, जिसमें टैरिफ में 26 प्रतिशत तक की कमी की जाएगी, यूरोपीय संघ के (4.67 लाख करोड़ रुपये यानी 53.6 अरब अमेरिकी डॉलर) मूल्य वाले समुद्री आयात बाजार के द्वार खोलेगी। इस बेहतर बाजार पहुंच से भारत के समुद्री निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय सुधार होने की आशा है, साथ ही यह यूरोपीय संघ को वर्तमान में 8,715 करोड़ रुपये (1 अरब अमेरिकी डॉलर) के समुद्री क्षेत्र में भारत की निर्यात क्षमता को पूरक और मजबूत करेगा। यह मुक्त व्यापार समझौता झींगा, बर्फ में सहेजी हुई मछली और मूल्यवर्धित समुद्री खाद्य पदार्थों के निर्यात को गति देगा। इससे आंध्र प्रदेश, गुजरात, केरल और अन्य तटीय समुदायों और भारत की नीली अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जा सकेगा।
भारत के चिकित्सा उपकरण, यंत्र और आवश्यक सामग्रियां
अत्याधुनिक विनिर्माण, नवाचार और कुशल प्रतिभा पर आधारित भारत के चिकित्सा उपकरण, यंत्र और आवश्यक आपूर्ति यूरोपीय संघ में अभूतपूर्व प्रगति के लिए तैयार हैं। 99.1 प्रतिशत व्यापारिक मार्गों पर 6.7 प्रतिशत तक के शुल्क हटा दिए गए हैं। इससे लेंस, चश्मे, चिकित्सा उपकरण, मापन और परीक्षण उपकरणों के लिए यूरोपीय बाजारों में लागत-प्रतिस्पर्धी प्रवेश संभव हो गया है।
भारत के आभूषण निर्यात को बढ़ावा देना और रोजगार के अपार अवसर पैदा करना।
कलात्मकता, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) उद्यम और पारंपरिक शिल्प कौशल का संगम रत्न एवं आभूषण क्षेत्र, यूरोपीय संघ के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन गया है। पहले 4 प्रतिशत तक के शुल्क से लेकर अब व्यापार मूल्य के 100 प्रतिशत हिस्से पर प्राथमिकता वाली पहुंच प्राप्त करने तक, भारत का 23.5 हजार करोड़ रुपये यानी 2.7 अरब अमेरिकी डॉलर) का आभूषण निर्यात, मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के माध्यम से 6.89 लाख करोड़ रुपये (79.2 अरब अमेरिकी डॉलर) के आयात बाजार में प्रतिस्पर्धी बन गया है।
सफलता की राह: वस्त्र और परिधान क्षेत्र में उच्च उपलब्धि
वस्त्र और परिधानों पर सभी शुल्क श्रेणियों को शामिल करते हुए शून्य शुल्क की पहुंच प्राप्त करने और शुल्कों में 12 प्रतिशत तक की कमी करने से यूरोपीय संघ का 22.9 लाख करोड़ रुपये यानी (263.5 अरब अमेरिकी डॉलर) का आयात बाजार खुल जाएगा। भारत के वर्तमान 3.19 लाख करोड़ रुपये यानी (36.7 अरब अमेरिकी डॉलर) के वैश्विक वस्त्र और परिधान निर्यात, इसमें यूरोपीय संघ को 62.7 हजार करोड़ रुपये यानी (7.2 अरब अमेरिकी डॉलर) का निर्यात शामिल है, को देखते हुए, इस प्रकार की पहुंच से अवसरों का उल्लेखनीय विस्तार होगा। इसमें विशेष रूप से सूती धागे, सूती धागे, मानव निर्मित फाइबर परिधान, रेडीमेड गारमेंट्स, पुरुषों और महिलाओं के परिधान और घरेलू वस्त्रों के क्षेत्र शामिल हैं। इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का विस्तार करने, रोजगार सृजित करने और एक विश्वसनीय, टिकाऊ और महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
प्लास्टिक और रबर के निर्यात को व्यापक रूप से लाभ होगा
भारत के प्लास्टिक और रबर उद्योगों को यूरोपीय संघ में प्राथमिकता वाली पहुंच प्राप्त होगी। इसका वैश्विक आयात मूल्य 27.67 लाख करोड़ रुपये (317.5 अरब अमेरिकी डॉलर) है। यूरोपीय संघ को भारत का वर्तमान निर्यात 20.9 हजार करोड़ रुपये (2.4 अरब अमेरिकी डॉलर) और कुल वैश्विक निर्यात 1.13 लाख करोड़ रुपये (13 अरब अमेरिकी डॉलर) है। यह पहुंच विकास की अपार संभावनाओं को रेखांकित करती है। मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत बढ़ी हुई पहुंच, भारत के कुशल विनिर्माण कार्यबल और लघु एवं मध्यम उद्यमों द्वारा संचालित नवाचार के साथ मिलकर, देश में रोजगार बढ़ाने, निर्यात को बढ़ावा देने और वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करने में सक्षम बनाती है।
रसायन उद्योग: निर्यात में विस्तार, रोजगार सृजन
मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भारत के रासायनिक निर्यात के 97.5 प्रतिशत हिस्से पर शून्य शुल्क सुनिश्चित करता है। इससे 12.8 प्रतिशत तक का शुल्क समाप्त हो जाता है और अकार्बनिक, जैविक और कृषि रसायनों के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है। इससे एफटीए निर्यात को बढ़ावा मिलने, एमएसएमई-नेतृत्व वाले समूहों को मजबूत करने और उच्च मूल्य वाले, टिकाऊ और तकनीकी रूप से उन्नत उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने की आशा है। इससे भारत, यूरोपीय संघ के लगभग 43.57 लाख करोड़ रुपये (500 अरब अमेरिकी डॉलर) के रासायनिक आयात बाजार में एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित होगा।
खान और खनिज क्षेत्र में अवसरों को खोलना
सभी शुल्क वाली उत्पाद श्रृंखलाओं पर शून्य शुल्क लागत सम्बंधी बाधाओं को दूर करता है। इससे भारत यूरोपीय संघ को गुणवत्तापूर्ण, विश्वसनीय और मूल्यवर्धित खनिजों का निर्यात सुनिश्चित कर सकता है। यह मुक्त समझौता यूरोप के उच्च-मूल्य वाले बाजारों में भारत की उपस्थिति को बढ़ाने के अवसर प्रदान करता है, जबकि दीर्घकालिक और पूर्वानुमानित पहुंच इस्पात, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में यूरोपीय निर्माताओं के साथ साझेदारी को बढ़ावा देती है।
घरेलू सजावट, लकड़ी के शिल्प और फर्नीचर के लिए महत्वपूर्ण बाजार पहुंच
10.5 प्रतिशत तक की कम शुल्क दर से बाजार तक पहुंच बेहतर होती है, इससे भारतीय लकड़ी, बांस और हस्तशिल्प फर्नीचर की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है। यह मुक्त व्यापार समझौता उच्च मूल्य वाले, डिजाइन-उन्मुख क्षेत्रों में वृद्धि को बढ़ावा देता है और वैश्विक फर्नीचर आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका को मजबूत करता है।
