इंडिया एआई, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), और आईआईटी हैदराबाद ने सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन कार्य समूह बैठक की मेजबानी की
समावेशी, मानव-केंद्रित और जिम्मेदार एआई अपनाने को बढ़ावा देना
कार्य समूह की चर्चाओं से इंडिया एआई प्रभाव सम्मेलन 2026 की जानकारी मिलेगी
इंडिया ए आई मिशन, इलेक्ट्रॉनिक एवम् सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने आईआईटी हैदराबाद के सहयोग से आज आईआईटी हैदराबाद परिसर में सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन पर कार्य समूह बैठक की मेजबानी की।
इस बैठक में वरिष्ठ नीति निर्माता, शैक्षणिक नेता, उद्योग विशेषज्ञ और शोधकर्ता एकत्र हुए ताकि समावेशी एआई विकास, एआई की सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ाने और एआई द्वारा संचालित अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने पर राष्ट्रीय चर्चाओं को आगे बढ़ाया जा सके।
यह बैठक इंडिया ए आई प्रभाव सम्मेलन 2026 का अग्रदूत है, जिसका आयोजन 16-20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में होने वाला है। और यह पूरे देश में आयोजित की जा रही कार्य समूह परामर्श श्रृंखला का भी हिस्सा है ताकि शिखर सम्मेलन की विषयगत एजेंडा और परिणामों को जानकारी प्रदान की जा सके।
उद्घाटन सत्र में कार्य समूह के भारतीय अध्यक्ष श्री राजेश अग्रवाल, महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव; राजदूत थॉमस श्नाइडर, स्विट्जरलैंड के संघीय संचार कार्यालय के निदेशक; प्रो. बी.एस. मूर्ति, आईआईटी हैदराबाद के निदेशक; डॉ. नलिन कुमार श्रीवास्तव, MeitY के एआई एवं ईटी डिवीजन के अतिरिक्त निदेशक; तथा श्री ची. भारत रेड्डी, तेलंगाना सरकार के संयुक्त निदेशक (ई-गवर्नेंस) के उद्बोधन हुए। सभी वक्ताओं ने भारत की एआई यात्रा के केंद्र में समावेशन, विश्वास और सामाजिक संदर्भ को स्थापित करने के महत्व पर बल दिया।
प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए, आईआईटी हैदराबाद के निदेशक प्रो. बी.एस. मूर्ति ने कहा, “यदि भारत वास्तव में एआई में नेतृत्व करना चाहता है, तो हमें साहसिक कदम उठाने होंगे। एआई को बहु-विषयी होना चाहिए, जो इंजीनियरिंग, पदार्थ विज्ञान, उदार कला और इससे आगे सभी को एक साथ लाए। मजबूत आधारभूत सिद्धांतों से लेकर वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों तक, हमारा ध्यान जीवन को बेहतर बनाने पर होना चाहिए, साथ ही जिम्मेदार और स्वीकार्य एआई की चुनौतियों का समाधान भी करना चाहिए।”
कार्य समूह के लिए संदर्भ निर्धारित करते हुए, MeitY के एआई एवं ईटी डिवीजन के अतिरिक्त निदेशक श्री डॉ. नलिन कुमार श्रीवास्तव ने कहा, “यह सभा समावेशन, पहुंच, जिम्मेदारी और एआई में समानता के महत्वपूर्ण मुद्दों को संबोधित करने के लिए प्रज्वलित मन को एक साथ लाती है। यह केवल प्रौद्योगिकी के बारे में नहीं है, यह सामाजिक सशक्तिकरण के बारे में है, जिसमें लोग केंद्र में हैं। एआई कोई प्रौद्योगिक विकल्प नहीं है, यह हमारा नैतिक कर्तव्य है।”
अपने मुख्य उद्बोधन में, महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने जोर दिया, “भारत का एआई पर कार्य कुल सात मेरुदंड( वर्टिकलस) के इर्द-गिर्द संरचित है, जिनमें से एक सामाजिक सशक्तिकरण पर केंद्रित है, जिसमें कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सक्रिय भागीदारी है। जबकि एआई विज्ञान, सामग्री, स्वास्थ्य सेवा और शोध में प्रगति को सक्षम कर रहा है, जिसका अंतिम मकसद विभिन्न सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के लोगों की सेवा करना है।
भारत ने मजबूत डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा विकसित किया है, और इसका अगला कदम इन प्रणालियों में एआई परत जोड़ना है। जैसे-जैसे एआई बढ़ेगा, इसे सभी के लिए काम करना चाहिए, डेटा और भाषा में पूर्वाग्रह को संबोधित करना चाहिए, और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रौद्योगिकी असमानताओं को न बढ़ाए बल्कि समाज के सभी वर्गों की मदद करे।”
तेलंगाना सरकार के संयुक्त निदेशक (ई-गवर्नेंस) श्री ची. भारत रेड्डी ने तेलंगाना सरकार के नवाचार पर महत्व दिए जाने के बारे में बात की और कहा, “हमारा ध्यान हमेशा विकास पर रहा है, और नई प्रौद्योगिकियों का अपनाना उस उद्देश्य का केंद्रीय हिस्सा है। मैं तेलंगाना सरकार का प्रतिनिधित्व करता हूं, और ये प्रयास मजबूत, भविष्य-तैयार नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र निर्माण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। दिल्ली में आगामी इंडिया एआई प्रभाव सम्मेलन में, इन विषयों को केंद्रित ब्रेकआउट सत्रों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा, जो इसके विभिन्न हितधारकों के बीच गहन चर्चा और सहयोग को सक्षम बनाएंगे।”
मुख्य उद्बोधन देते हुए, स्विट्जरलैंड के संघीय संचार कार्यालय के निदेशक राजदूत थॉमस श्नाइडर ने उजागर किया, “एआई का उपयोग सतत तरीके से किया जाना चाहिए ताकि हम अपने ग्रह को ऐसी स्थिति में रख सकें जो आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारा घर बना रहे। एआई का उपयोग प्रगति के लिए किया जाना चाहिए, जिसमें आर्थिक और सामाजिक विकास शामिल है, और एआई तथा डेटा द्वारा प्रदान किए गए अवसरों को आज लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों को पार करने के लिए हथियाया जाना चाहिए।
यह प्रगति केवल कुछ के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए होनी चाहिए, वह भी लोगों की गरिमा, मौलिक अधिकारों और स्वायत्तता का सम्मान करते हुए और यह सुनिश्चित करते हुए कि कोई पीछे न छूटे। जब इसे जिम्मेदारीपूर्वक डिजाइन कर तैनात किया जाए, तो एआई भलाई के लिए एक शक्तिशाली उपकरण बन सकता है। लेकिन हमें पूर्वाग्रह, असमानता और बहिष्कार के खिलाफ सतर्क रहना चाहिए। समावेशी, बहुपक्षीय और बहु-हितधारक सहयोग एआई की तरफ से सामान्य हित की सेवा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। इसी भावना में, एआई के माध्यम से समावेशन को आगे बढ़ाने के लिए गठबंधन होना चाहिए। यह एआई को सभी के लिए अवसर बनाने और कुछ के लिए विशेषाधिकार न बनाने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
”कार्यक्रम 'एआई के साथ भारत की पुनर्कल्पना' शीर्षक मुख्य उद्बोधन में परिवर्तित हो गया, जिसे रिलायंस जियो के मुख्य डेटा वैज्ञानिक प्रो. शैलेश कुमार ने प्रस्तुत किया। इसमें राष्ट्रीय विकास को स्केल करने में नवाचार की भूमिका की जांच की गई। इसके बाद 'समावेशी एआई विकास को बढ़ावा देने' पर पहली पैनल चर्चा हुई, जिसमें प्रो. सुमोहना चन्नप्पय्या (आईआईटीएच); श्री रोमी श्रीवास्तव, हनीवेल; श्री स्वरूप शांति मेदासनी (मैथवर्क्स); श्री रामिया कन्नन बाबू (इंटेल) और प्रो. चक्रवर्ती भगवती (हैदराबाद विश्वविद्यालय) की भागीदारी रही।
विशेषज्ञों ने एआई जीवनचक्र में समावेशिता को कैसे अंतर्निहित किया जा सकता है—प्रारंभिक डेटा संग्रह और डिजाइन से लेकर तैनाती और शासन तक में इसका उपयोग कैसे हो, इसकी प्रस्तुति दर्शाई ।
पैनलिस्टों ने अनुसंधान और उद्योग अनुभव पर आधारित होकर, पूर्वाग्रह को कम करने, पहुंच का विस्तार करने और सामाजिक तथा आर्थिक समावेशन को आगे बढ़ाने वाले एआई प्रणालियों के निर्माण की साझा जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए व्यावहारिक रणनीतियों पर चर्चा की।
दूसरा पैनल, “एआई की सामाजिक स्वीकार्यता : अवसर और चुनौतियां,” श्री राजेश अग्रवाल द्वारा शुरू किया गया और इसमें अवर्तन लैब्स के एलवी प्रसाद आई हॉस्पिटल, 1*वर्क्स और कॉन्च डीपटेक वेंचर स्टूडियो तथा रीएन फाउंडेशन के सहयोग से उद्योग प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं तथा सिविल सोसाइटी विशेषज्ञों के बीच चर्चा शामिल की गई। इस सत्र में स्वास्थ्य सेवा और सार्वजनिक सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एआई के अनुपालन के परिवर्तनकारी अवसरों और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
प्रतिभागियों ने विश्वास, जवाबदेही और तैयारी के विषयों की खोज की, जिसमें फ्रंटलाइन तैनाती अनुभवों पर आधारित होकर यह प्रदर्शित किया गया कि डेवलपर्स और समुदायों के बीच सहयोग एआई को कैसे सार्थक सामाजिक लाभ प्रदान करना सुनिश्चित कर सकता है।
कार्यक्रम में स्टार्टअप पिच सत्र, विभिन्न शिक्षा स्तरों के छात्र दृष्टिकोण तथा संरचित नेटवर्किंग चर्चाएं भी शामिल रहीं, जो नवप्रवर्तकों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के बीच आपसी संलग्नता को सक्षम बनाती रही।
दिन का समापन आईआईटी हैदराबाद पर सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन कार्य समूह की बंद-कक्ष हाइब्रिड बैठक के साथ हुई। इसमें अंतर्दृष्टियों और सिफारिशों को समेकित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
आईआईटी हैदराबाद पर सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन कार्य समूह बैठक के समागम की चर्चाओं से इंडिया एआई प्रभाव सम्मेलन 2026 में राष्ट्रीय स्तर की चर्चाओं को बल मिलेगा। यह इंडिया ए आई मिशन के तहत समावेशी, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित एआई पारिस्थितिक तंत्र निर्माण की भारत सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा, जो विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण से भी जुड़ा हुआ है।
