23वीं श्रीमद् भगवद्गीता राष्ट्रिय व्याख्यान गोष्ठी

23वीं श्रीमद् भगवद्गीता राष्ट्रिय व्याख्यान गोष्ठी

संस्कृत विभाग, दयानन्द वैदिक कॉलेज उरई, जालौन, संस्कृत विभाग, प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय* प्रयागराज एवं चातुर्वेद संस्कृत प्रचार संस्थानम्, काशी, उत्तर प्रदेश 

      इन तीनों संस्थानों के संयुक्त तत्वावधान में 23वीं श्रीमद्भागवद्गीता राष्ट्रिय व्याख्यान गोष्ठी का आयोजन दिनांक 23 नवम्बर 2023 को शाम 6:00 बजे से 8.30 तक ऑनलाइन माध्यम से हुआ। 

राष्ट्रिय व्याख्यान गोष्ठी में Zoom ऑनलाइन प्लेटफॉर्म एवं "विश्वसंस्कृतकुटुम्बम्" इस फेसबुक लाइव पटल के माध्यम से 150 से ज्यादा सुधी एवं गीतारसामृत का पान करने वाले लोग जुड़े।

      संगोष्ठी में सर्वप्रथम विशिष्ट वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े श्रीमद् भगवद्गीता विशेषज्ञ डॉ. सर्वेश कुमार मिश्र ने "श्रीमद् भगवद्गीता विषाद निवृत्ति का रामबाण" इस विषय पर गम्भीर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि गीता के माध्यम से हमें विषाद (कष्ट) से मुक्ति के कई मार्ग प्राप्त हो जाते हैं। गीता हमारा जीवन सिद्धान्त है। जीवन जीने की कला सीखने वालों को गीता अवश्य पढ़नी चाहिए। 

      मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर नरेन्द्र अवस्थी, पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष जेएन व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर, राजस्थान ने "गीता में साम्यवाद : पं० मधुसूदन ओझा की दृष्टि में" इस विषय पर अपना अद्भुत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि गीता अद्वैत वेदान्त का ग्रन्थ है। इसका स्थान उपनिषदों के बराबर है। उन्होंने आत्मा के विषय में कहा कि आत्मा प्रतिक्षण हमें ज्ञान और आभास कराती है। मुख्य वक्ता ने पांच प्रकार के साम्यवादों की चर्चा की और कहा कि साम्यवाद समानता का दूसरा रूप है। गीता हमें समानता का भाव सिखाती है सबको ईश्वर का रूप समझना गीता का प्रमुख संदेश है।

       डीवी कॉलेज उरई के प्राचार्य प्रोफेसर राजेश चन्द्र पांडेय ने कहा कि हमारे कॉलेज का अन्य संस्थाओं के साथ जुड़ना गौरव की बात है। हम इसी प्रकार से अपने महाविद्यालय को भारत के बड़े संस्थानों के साथ जोड़कर बड़े-बड़े कार्यक्रमों के आयोजन के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि  गीता हमारी आचार संहिता है। क्या करना है क्या नहीं करना है इससे हम आसानी से जान सकते हैं। आज विश्व को गीता के सिद्धान्तों को व्यवहार में लाने की आवश्यकता है। यही कार्य स्वामी विवेकानन्द जी ने भी किया था।

       कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति पुरस्कार के साथ-साथ वाल्मीकि पुरस्कार, बाणभट्ट पुरस्कार  20 से ज्यादा बड़े पुरस्कारों से सम्मानित संस्कृत साहित्य के वरिष्ठ एवं रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से सेवानिवृत्त विद्वान् प्रोफेसर रहस बिहारी द्विवेदी जी ने की। 

       कार्यक्रम में समन्वयक असि. प्रोफेसर डॉ. प्रवीण कुमार द्विवेदी, डॉ. पीयूष मिश्र, प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय प्रयागराज, संयोजक डॉ. चन्द्रकान्त दत्त शुक्ल असि. प्रोफेसर राजकीय महाविद्यालय मोहम्मदाबाद, गोहना मऊ, उoप्रo रहे।

       कार्यक्रम के संचालन एवं संयुक्त संयोजक का दायित्व डॉ. सर्वेश कुमार शाण्डिल्य, असि० प्रोफ़ेसर एवं अध्यक्ष डीवी कॉलेज उरई ने निभाया।

       इस अवसर पर भारत के कई क्षेत्रों से डॉ. आभा द्विवेदी, डॉ. गीता शुक्ला, प्रो. मंजूलता शर्मा, डॉ. अरविन्द तिवारी, डॉ. प्रांगेश मिश्र, डॉ. प्रीति बधवानी, डॉ. मूलचन्द्र शुक्ला, प्रो. सुनीता जायसवाल, डॉ. सरोज कौशल, डॉ. अतुल प्रकाश बुधौलिया, डॉ. प्रियंका आर्या, डॉ. नेहा मिश्रा, डॉ. सचिन द्विवेदी, डॉ. वी. राजगोपालन आदि उपस्थित रहे। 


पंजीकरण कराने एवं फीडबैक फॉर्म भरने वालों को व्याख्यान गोष्ठी का प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा।

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Journalist Anil Prabhakar

Editor UPVIRAL24 NEWS