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सोमवार, 18 मई 2020

यू-ट्यूब पर घर बैठे देखे उत्तर प्रदेश की लोक कला प्रदर्शनी

यू-ट्यूब पर घर बैठे देखे उत्तर प्रदेश की लोक कला प्रदर्शनी   संवाददाता, Journalist Anil Prabhakar.                 www.upviral24.in

उत्तर प्रदेश यू - ट्यूब पर घर बैठे देखी प्रदेश की लोक कला प्रदर्शनी अंतरराष्ट्रीय दिवस पर लोक कला संग्रहालय की पहल लखनक : 18 मई 2020 अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर प्रदेश के अपने तरह के एक मात्र केन्द्र , लोक कला संग्रहालय की ओर से लॉकडाउन का पालन करते हुए पहली बार ऑनलाइन प्रदर्शनी का आयोजन किया गया । इसमें यू - ट्यूब ही नहीं फेसबुक वॉट्सऐप आदि से प्रदेश के विभिन्न खंडों की पांरपरिक लोक कलाओं की जानकारियां स्लाइड - शो के माध्यम से दी गई । प्राणी उद्यान स्थित संग्रहालय परिसर में हर साल अंतरराष्ट्रीय दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से हर उम्र के लोगों को जोड़ा जाता रहा है । इस साल कोरोना संकट के दौर में भी यह क्रम रुका नहीं बल्कि इसने वैश्विक रूप प्राप्त किया । लोक कला संग्रहालय की प्रभारी संग्रहालयाध्यक्ष डॉ.मीनाक्षी खेमका की परिकल्पना में ऑनलाइन प्रदर्शनी का आयोजन किया गया । यू - ट्यूब पर संग्रहालय ऑनलाइन प्रदर्शनी का लिंक https://www.youtube.com/watch?v=iBVIT HepsPU इसकी मदद से लोगों ने अपने घरों या कार्यालयों में बैठे - बैठे अपने प्रदेश की उन्नत लोक विरासत को जाना । इसमें एक ओर जहां लोक संगीत वाद्यों को शामिल किया गया वही दूसरी ओर लोक हस्तशिल्प को भी । उन्होंने बताया कि वर्ष 1983 में 18 मई को संयुक्त राष्ट्र ने संग्रहालय की विशेषता एवं महत्व को समझते हुए अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाने का निर्णय लिया गया था । ' लोक कला संग्रहालय लोक कला के विविध आयाम नाम की इस दिलचस्प और गागर में सागर समेटती ऑनलाइन प्रदर्शनी में सबसे पहले भोजपुर क्षेत्र के दर्शन होते हैं । उसमें वहां के प्रचलित वाद्ययंत्र में ढोलक की तरह दिखने वाले मादकए उंगलियों से बजने वाला झांझ और करताल - मंजीरे को दर्शाया गया । मुखौटा कला में प्रथम देव गणेश के साथ काली माई और महादेव के मुखौटे देखते ही बने । रामलीला के बिना तो प्रदेश की कला यात्रा ही अधूरी रह जाएगी । इसमें जरीदार कपड़े और आभूषण भी ऑनलाइन प्रदर्शनी का आवश्यक अंग बनते है । अवध क्षेत्र में प्रचलित ब्रास का हुक्काए रामतीर्थ की मूर्तिए टेराकोटा में बनी पहाड़ी औरत , बंदगोभी , हरदल का भित्ती चित्र ज्ञानवर्धक लगा । प्रदर्शनी के माध्यम से बताया जा रहा है कि अवध में प्रचलित जांघिया नटवरी लोक नृत्य की पोशाक खास होती है । उसमें लाल रंग की जाघियां में धुंघरू लगे होते हैं । ब्रज क्षेत्र में बहु प्रचलित सांझी कला में पनिहारिनए गज - ग्राह की कहानी को चित्रित किया गया है । बुंदेलखंड क्षेत्र का अलंकृत हाथ का पंखा , धातु से तैयार खिलौना घोड़ा गाड़ीए मटकी , दवात ही नहीं हरदौला बाबा का चित्र भी आकर्षित करता है । इसमें वह अश्व पर सवार तलवार थामे दर्शाए गए हैं । रुहेलखंड क्षेत्र के लकङी का पात्र हो या फिर कुमायूं क्षेत्र की ज्यूति ऐपण प्रदेश की विविधता को बखूबी दर्शाते हैं । गढ़वाल में प्रचलित जन्माष्टमी और गोवर्धन पट्टा आस्था और कला के गहरे सम्बंधों को उजागर करता है । लोक कला संग्रहालय , लखनऊ की प्रभारी डॉ . मीनाक्षी ने बताया कि यू - ट्यूब के कारण इस प्रदर्शनी को लोग अपने सुविधा से अब कभी भी और कहीं भी नि : शुल्क देख सकेंगे । उन्होंने बताया कि ऑनलाइन प्रदर्शनी का क्रम आगे भी जारी रहेगा । प्रयास किया जाएगा कि हर महीने लोकपरंपराओं पर आधारित जानवर्धन और रोचक एक ऑनलाइन प्रदर्शनी अपलोड की जाए ।





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